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Main Point
  1. class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi
  2. class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi
  3. कक्षा 10 इतिहास अध्याय 2 नोट्स pdf
    1. ( pdf का link आपको आर्टिकल का अंत में मिल जाएगा )
    2. इस अध्याय पर मेरा पूरी व्याख्या:-
    3. पाठ-2 कक्षा-10 इतिहास (Main Point Study)
  4. (Part-1)
    1. भारत में राष्ट्रवाद : –
      1. आजादी की कहानी
        1. पहला विश्व युद्ध , खिलाफत और और सहयोग
        2. सत्याग्रह का विचार
      2. रॉलेट एक्ट
      3. ( pdf का link आपको आर्टिकल का अंत में मिल जाएगा )
  5. (Part -2)
    1. आंदोलन के भीतर अलग-अलग धाराएं
      1. शहरो मे आंदोलन
      2. ग्रामीण इलाकों में विद्रोह
      3. story:-
      4. बागानों में स्वराज :-
  6. part-3
    1. सविनय अवज्ञा आंदोलन की ओर
      1. सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण
        1. ( i )1927 मे बनी साइमन कमीशन
        2. ( ii ) 1929 आई में विश्वव्यापी आर्थिक मंदी
      2. सविनय अवज्ञा
        1. नमक यात्रा
  7. Part-4
    1. लोगों ने आंदोलन को कैसे लिया
      1. संपन्न किसान
      2. गरीब किसान
      3. व्यावसायिक वर्ग
      4. औद्योगिक श्रमिक
      5. महिलाए
      6. सविनय अवज्ञा की सीमाएं ( धर्म + जाति )
  8. Part -5
    1. सामूहिक अपनेपन का भाब
      1. ( i ) भारत माता की तस्वीर
      2. ( ii ) लोक कथाओं को पुनर्जीवित करना
      3. ( iii ) चिन्ह और प्रतीक
      4. ( iv )इतिहास की पुनर व्याख्या
  9. कक्षा 10 इतिहास अध्याय 2 नोट्स pdf
    1. class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi
    1. (1) राष्ट्रवाद का अर्थ
      1. (i) प्रथम विश्व युद्ध का भारत पर प्रभाव तथा युद्ध पश्चात परिस्थितियां
      2. (ii) सत्याग्रह का अर्थ
      3. (iiii) महात्मा गांधी के सत्याग्रह का अर्थ
      4. (iv)महात्मा गांधी द्वारा भारत में किए गए सत्याग्रह के आरंभ
      5. (v)रौलट एक्ट 1919
      6. (vi) अन्याय पूर्व
      7. (v)परिणाम
      8. (vi) रौलट एक्ट 1919 ( बिस्तर में )
  10. class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi (FAQ)
    1. फुल चैप्टर एक्सप्लैनेशन आपको नोट्स में मिल जाएगा
  11. class 10 history chapter 2 notes PDF Link
  12. Conclusion

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कक्षा 10 इतिहास अध्याय 2 नोट्स pdf

इस अध्याय पर मेरा पूरी व्याख्या:-

पाठ-2 कक्षा-10 इतिहास (Main Point Study)

(Part-1)

भारत में राष्ट्रवाद : –

ब्रिटिश के आने से पहले भारत एक ताकतवर और विकसित देश था।

1612
ब्रिटिश सबसे पहले भारत आए
(ईस्ट इंडिया कंपनी )
1757
( प्लासी के जंग )
( भारत ब्रिटिश के अधीन आ गया )
परंतु आज भारत एक आजाद देश है

आजादी की कहानी

पहला विश्व युद्ध , खिलाफत और और सहयोग
  • पहला विश्व युद्ध 1914 में शुरू हुआ उस समय भारत ब्रिटिश का उपनिवेश था।
  • विश्व युद्ध के कारण ब्रिटिश का रक्षा व्यय बढ़ने लगा।
  • इस खर्चे की भरपाई करने के लिए युद्ध के नाम पर कर्ज लिए गए और कोरा में वृद्धि की गई।
  • सीमा शुल्क बढ़ा दिया गया और आयकर शुरू किया गया
  • युद्ध के दौरान कीमत बी तेजी से बढ़ रही थी।
  • 1913 से 1918 के अवधि कीमते दुगनी हो चुकी थी जिसके कारण आम लोगों की मुश्किले बढ़ गई थी।
  • गांव में लोगों को सेना में जबरन भर्ती किया गया जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में व्यापक गुस्सा था।
  • 1918-19 और 1920-21 मैं देश के बहुत सारे हिस्सों में फसल खराब हो गई जिसके कारण खाद्य पदार्थ में कमी आ गई उसी समय फ्लू की महामारी फैल गई।
  • 1921 की जनगणना के अनुसार महामारी के कारण 120 -130 लाख लोग मरे गए।
  • लोगो की उम्मीद थी की युध्ह खत्म हने के बाद उनकी मुसीबत कम हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सत्याग्रह का विचार
  • महात्मा गांधी जनवरी 1915 मे भारत लौटे।
  • इससे पहले बह दक्षिण अफ्रीका में थे जहां उन्होंने एक नए तरह के जन आंदोलन के रास्ते पर चलते हुए वहां की नस्लभेदी सरकार से लोहा नया इस पद्धति को वह सत्याग्रह कहते थे।
  • सत्याग्रह के विचार से सत्य की शक्ति और सत्य की खोज पर जोर दिया जाता था इसका अर्थ यह था की अगर आपका उद्देश्य सत्य है यदि आपका संघर्ष अन्याय के खिलाफ है तो आप का मुकाबला करने के लिए आपको किसी शारीरिक बल की आवश्यकता नहीं है। ( सत्याग्रह = निष्क्रिय प्रतिरोध = अहिंसा )
  • भारत मे आने के बाद गांधी जी ने कई स्थानो पर सत्य आंदोलन चलाया।
1916
चंपारण सत्याग्रह
बिहार

( दमनकारी बागान व्यवस्था
के खिलाफ किसानो
के संघर्षों के लिए)
1917
खेड़ा, गुजरात
( फसल खराब हो जाने और
प्लेग की महामारी के कारण
खेड़ा के किसान लगान चुकाने
के हालत मे नहीं थे बे चाहते थे
लगान मे ढील दी जाए)
1918
अहमदाबाद, गुजरात
( गांधी जी ने सूती कपड़ा
कारखाने के मजदूरो के बीज
सत्याग्रह आंदोलन चलाया )
( मजदूरी मे बढ़ोतरी )
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रॉलेट एक्ट

  • फरवरी 1919 मे ब्रिटिश सरकार ने रौलट एक्ट पारित किया।
  • भारतीय सदस्यो के भारी विरोध के बावजूद इस कानून को इम्पीरियल लेजिस्लेटीब काउंसिल ने बहुत जल्दबाजी मे पारित किया।
  • रौलट एक्ट : इस कानून के जरिए सरकार को किसी भी राजनीतिक कैदियों को 2 साल तक बिना मुकदमा चलाये जेल मे बंद रखने का अधिकार मिल गया था।
  • गाँधी जी ने 1919 मे रौलट एक्ट के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह जन आंदोलन चलाने के फैसला लिया।
  • गांधीजी ऐसे कानून के खिलाफ अहिंसक ढंग से नागरिक अबज्ञा ( आंदोलन ) चाहते थे उसे 6 अप्रैल से शुरू होना था।[ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

  • विभिन्न रास्ते में रेली जुलूस का आयोजन किया गया
  • रेलवे वर्कशॉप मे कामगार हड़ताल पर चले गए।
  • दुकान बंद हो गई
  • इस आंदोलन को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने मार्शल लॉ लागू कर दिया और जनरल डायर ने कमान संभाल ली।
  • 13 अप्रैल को जालियांवाला बाग हत्याकांड हुआ
  • उस दिन बहुत सारे गांव वाले वैशाखी के वार्षिक मेले मे शिरकत करने के लिए जालियांवाला बाग आए थे।
  • शहर से बाहर गांव में रहने वाले लोगों को मार्शल लॉ के बारे में जानकारी नहीं थी।
  • जनरल डायर ने मैदान से बाहर निकलने और अंदर आने का रास्ता बंद करवा दिया और सिपाहियों को भीरपुर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया, सैकड़ों लोग मारे गए।
  • बाद में उसने बताया कि वह सत्याग्रहीयो के जहन मे दहशत और एक नैतिक प्रभाव उत्पन्न करना चाहता था जैसे-2 जलियांवाला बाग की खबर फैली उत्तर भारत में लोग सड़कों पर उतरने लगे।
  • हड़ताले होने लगी, सरकारी इमारतो पर हमला होने लगा।
  • सरकार ने इन कार्यबाइयो को निर्ममता से कुचलने का रास्ता अपनाया।
  • सत्याग्रहीयो को जमीन पर नाग रगड़ने के लिए, सड़क पर घीसट कर चलने और सारे साहिबो को सलाम मारने के लिए मजबूर किया गया।
  • भले ही रॉलट सत्याग्रह एक बहुत बड़ा आंदोलन था लेकिन अभी भी वह मुख्य रूप से शहरो और कस्य्बो तक सीमित था।[ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

  • महात्मा गांधी परे भारत मे और भी ज्यादा जनाधार बाला आंदोलन खड़ा करना चाहते थे।
  • लेकिन उनका मानना था कि हिंदू मुसलमानो को एक दूसरे के नजदीक लाए बिना ऐसा कोई आंदोलन नहीं चलाया जा सकता।
  • उन्हें लगता था कि खिलाफत का मुद्दा उठाकर बे दोनों समुदायो को नजदीक ला सकते थे।
  • खिलाफत मुद्दा : पहले विश्व युद्ध मे ऑटोमन तुर्की की हार हो चुकी थी। और अफवाह फैली की इस्लामिक विश्व के आध्यात्मिक ने (खलीफा) ऑटोमन सम्राट पर बहुत सख्त शांति संघी थोपी जाएगी।
  • खलीफा की तत्कालिक शक्तियो की रक्षा के लिए मार्च 1919 मुंबई में एक खिलाफत समिति बनाई गई।
  • मोहम्मद अली और शौकत अली बंधुओ के साथ कोई मुस्लिम नेताओ ने इस मुद्दे पर जन कार्यवाईयो की संभावना तलाशने के लिए महात्मा गांधी के साथ चर्चा शुरू कर दी थी।
  • सितंबर 1920 मे कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन मे महात्मा गांधी ने भी दूसरे नेताओं को इस बात पर राजी कर लिया की खिलाफत आंदोलन के समर्थन और स्वराज के लिए एक ओशहयोग आंदोलन शुरू किया जाना चाहिए।
  • असहयोग ही क्यों ?
  • अपनी पुस्तक हिंन्द स्वराज (1909) मे गांधी जी ने कहा था कि भारत में ब्रिटिश शासन भारतीयों के सहयोग से स्थापित हुआ था और यह शासन इस सहयोग के कारण चल पा रहा है।
  • अगर भारत के लोग अपना सहयोग वापस ले ले तो साल भर के भीतर ब्रिटिश शासन हट जाएगा और स्वराज की स्थापना हो जाएगी।
  • गांधीजी का मानना था कि सबसे पहले लोगो को सरकार द्वारा दी गई पद्तियां लौटा देना चाहिए, और सरकारी नौकरियो , सेना, पुलिस,अदालतो, विधायी पोरिसदो, स्कूलो और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना चाहिए।
  • परंतु कांग्रेश नवंबर 1920 में हो रही विधायी परीसदो के चुनाव का बहिष्कार करने से हिचकीचा रहे थे।
  • आखिरकार दिसंबर 1920 में कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में एक समझौता हुआ और असहयोग कार्यक्रम पर मोहर लगा दी गई।[ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

(Part -2)

आंदोलन के भीतर अलग-अलग धाराएं

असहयोग – खिलाफत आंदोलन जनवरी 1921 मे शुरू हुआ।

आंदोलन महात्मा गांधी ,मोहम्मद अली और शौकत अली द्वारा शुरू हुआ।

आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूह ने हिस्सा लिया।

सभी ने स्वराज के आह्वान को शिकार तो किया लेकिन उनके लिए उसके अर्थ अलग-अलग थे।

1- शहरो मे आंदोलन2- ग्रामीण इलाको मे बिद्रोह3- बागानो मे स्वराज

शहरो मे आंदोलन

शहरों में आंदोलन मध्यम वर्ग द्वारा शुरू हुआ।

हमारे बच्चो ने स्कूल कॉलेज छोड़ दिया।

हेड मास्टर और शिक्षकों ने इस्तोफे सौप दिए।

बोकिलो ने मुकदमे लड़ना बंद कर दिया।

मद्रास के अलावा ज्यादातर प्रांतो मे परिषद चुनाबो का बहिष्कार किया गया ( जस्टिस पार्टी )

विदेशी सामानों का बहिष्कार किया गया।

शराब की दुकानो की पिकेटिंग ( विराट का एक ऐसा स्वरूप जिसमे लोग किसी दुकान, दफतर , फैक्ट्री मे जाने का रास्ता रोक देते हैं।

विदेशी कपड़ों को इकट्ठा करके जलाया जाने लगा

लोगों ने विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करके भारतीय कपडो को पहना जिससे भारतीयो कपड़ा मिलो और हथकरधो का उत्पादन भी बढ़ने लगा।

1921 मे 102 करोड़ों रुपये के कपड़ो का आयात होता था जो 1922 ने घटकर 57 कौन रह गया।

परंतु कुछ समय बाद स्वरो मे यह आंदोलन धीमा होने लगा

खादी का कपड़ा ब्रिटिश के कपड़ो मिलो मे बनने वाले कपड़े से बहुत महंगा था गरीब उसे नहीं खरीद सकते थे।

भर्तियों संस्थाओ का आभास [ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

ग्रामीण इलाकों में विद्रोह

ज्यादातर लोग ग्रामीण इलाकों में खेती करते थी और उन्हें बेगार( बिना किसी वेतन के काम करना ) करना पड़ता था।

story:-

अवध में सन्यासी बाबा रामचंद्र किसानों का नेतृत्व कर रहे थे।

बाबा रामचंद्र इससे पहले फिजी मे गिरमिटिया मजदूर के तौर पर काम कर चुके थे।

उनका आंदोलन तालुकदारो और जमीदारो के खिलाफ था जो उनसे ज्यादा कर वसूलते थे।

किसानों की मांग थी की लगान को कॉल किया जाए बेगार खत्म किया जाए और दमनकारी जमीदारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए।

जून 1920 में जवाहरलाल नेहरू ने अबोध के गांबो का दौरा कीया बातचीत की और उनकी व्यथा को समझने का प्रयास किया।

अक्टूबर तक जवाहरलाल नेहरू, बाबा रामचंद्र और कुछ अन्य लोगों के नेतृत्व में अवध किसान शोभा का गठन किया गया।

गांव में संगठन की 300 से ज्यादा शाखाएं खुली केबल एक महीने के अंदर

जब आंदोलन फैला तो तालुकदार और व्यापारियो के मकानों पर हमले होने लगे

बाजारों में लूटपाट होने लगी

अनाज के गोदामों पर कब्जा किया गया।

बहुत सारे स्थानो पर स्थानिय नेता किसानों को समझा रहे थे कि गांधी जी ने एलान कर दिया है की अब कोई लगान नेंही भरेगा और जमीन गरीबों में बांट दी जाएगी।

महात्मा गांधी के नाम पर लोग अपनी सारी कार्यबाईयो और आकांक्षाओ के सही ठहरा रहे थे।

अल्लूरी सीताराम राजू की कहानी, 1924 मे राजू को फांसी दे दी गई, राजू अपने लोगों के नीच लोकनायक बन चुके।

बागानों में स्वराज :-

ब्रिटिश सरकार ने इनलैड इमीग्रेशन एक्ट पास किया था

1859 के इनलैड इमीग्रेशन एक्ट के तहत बागानों मे काम करने वाले मजदूरों को बिना इजाजत बागान से बाहर जाने की छूट नहीं होती थी और उन्हे ऐसी इजाजत ना के बराबर ही दी जाती थी।

असम की बागनी मजदूरों के लिए आजादी का मतलब यह था कि बे उन चार दिबारियो से जब चाहे आ जा सकते है जिनमें उनको बंद करके रखा गया था।

जब उन्होंने असहयोग आंदोलन के बारे में सुना तो हजारों मजदूरों ने बागान छोड़ दिया और घर की ओर चल दिए।

उन्हें लगता था की गांधी राज आ रहा है और उन्हें यानि हरेक को गांव में जमीन मिल जाएगी।

परंतु वह अपने घर नहीं पहुंच सके, रेलवे और स्टीमरो की हड़ताओ के कारन बह रसते मे ही फस गए और उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया और उनकी बहुत बुरी तरह पिटाई हुई।

गोरखपुर स्तित चौरी-चौरा मे बाजार से गुजर रहा एक शांतिपूर्ण जुलूस पुलिस के साथ हिंसक टकराब मे बदल गया।

इस घटना को सुनते ही गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया (1922 feb) [ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

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part-3

सविनय अवज्ञा आंदोलन की ओर

कुछ कांग्रेस के नेता इस तरह के जगसंघर्ष से थक चुके थे। बे 1919 के गबर्णमेट ऑफ इंडिया एक्ट के तहत गठित की गई प्रांतीय चुनाव मे हिस्सा लेना चाहते थे।

उनको लगता था कि परीषोद मे रहते हुए ब्रिटिश नीतियों का विरोध करना, सुधारों की वकालत करना, और यह दिखाना भी महत्वपूर्ण है की यह परिषदे लोकतंत्र संस्था नहीं है।

C R दास और मोतीलाल नेहरू ने परिषदो मे जाने के लिए स्वराज पार्टी का गठन किया( 1922 )

परन्तु युबा नेता जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ज्यादा उग्र आंदलन और पूर्ण स्वतंत्रता मे बिस्वास रखते थे।

सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण

( i )1927 मे बनी साइमन कमीशन

परिषदों के भारतीय सदस्य ने पुलिस के अंदर Gout of India act 1919 कि कुछ कमियां उजागर कर दी

इसके परिणाम स्वरूप बनाया गया जिसका काम भारत में संवैधानिक व्यवस्था की कार्यशैली का अध्ययन करना और उसके बारे मे सुधान देना या

आयत का नाम ” साइमन कमीशन ” था जो 7 सदस्यों को आयुक्त था जिसमें कोई भी भारतीय नहीं था

इसी वजह से भारतीयों ने उसे बाइकट करने का सोचा

1928 मे जब साइमन कमीशन भारत पहुंचा तो उसका स्वागत “साइमन कमीशन वापस जाओ” के नारों से किया गया, कांग्रेश और मुस्लिम लोग ने भी सभी ने प्रदर्शनो मे हिस्सा लिया

एक ऐसे ही शांतिपूर्ण प्रदीन मे ब्रिटिश पुलिस ने हमला कर दिया जिस्से ,लाल लाजपट राय की मृत्यु हो गई

विरोध शांत करने के लिए वायसराय लार्ड इरतिन ने अक्टूबर 1929 मे भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस का गोलमाल सा एलान कर दिया

और कहा कि संविधान के बारे में चर्चा के लिए गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया जाएगा

इस प्रस्ताव में कांग्रेश अ संतोष थे

दिसंबर 1929 मे नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग को औपचारिक रूप से मान लिया गया

तय किया गया कि 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन लोग पूर्ण स्वराज के लिए संघर्ष की शपथ लेंगे

( ii ) 1929 आई में विश्वव्यापी आर्थिक मंदी

आर्थिक मंदी के सबसे ज्यादा असर कृषि उत्पाद और औद्योगिक वस्तुओं पर पड़ा

निर्धनता बहुत ज्यादा बढ़ गई(1930) और कर को बढ़ा दिया गया

उन्हीं दो कारण की वजह से गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया

सविनय अवज्ञा

राज्य की ओर से जारी किए गई कानून को नम्रता पूर्वक विरोध करना

सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने से पहले गांधी जी ने 31 जनवरी 1930 को बायसराय लार्ड इरतिन को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने मांग का उल्लेख किया जिसमें कुछ सामान्य मांगे थी कुछ कृषक को लेकर और कुछ उद्योगपतियों को लेकर थी। जैसे नमक कर खत्म करना भूमि कर कम करना। इरतिन ने मांगों को अ वास्तविक बताया।

गांधीजी ने एक और पत्र चेतावनी के रूप में लिखा उन्होंने लिखा अगर वह “मांगे” मार्च 1930 तक पूरी नहीं हुई तो कांग्रेसी सविनय अवज्ञा छोड़ देगी परंतु इरतिन ने मांगे मानने से साफ इंकार कर दिया।

गांधीजी ने सविनय अवज्ञा शुरू किया गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए नमो को चुना, नमो को अमीर गरीब सभी इस्तेमाल करते थे, यह भोजन का एक अभिन्न हिस्सा था।

इसीलिए नमक पर कर और उसके उत्पादन पर सरकारी इजारेदारी को महात्मा गांधी ने ब्रिटिश का सबसे दमनकारी पहलू बताया था। [ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

नमक यात्रा

गांधी जी ने नमक कर तोड़ने के लिए नमक जात्रा की।

महात्मा गांधी ने अपने 78 बिस्वस्त बालटियरो के साथ मार्च 1930 को नमक जात्रा शुरू करी थी।

यह यात्रा साबरमती मे गांधी के आश्रम से 240 कि.मी. दूर दांडी नमक तटीय कख्ये में जाकर खत्म होनी थी।

गांधी जी की टोली ने 24 दिन तक हर रोज 10 मील का सफर तय किया।

गांधी जी जहां भी रुकते बह स्वराज का अर्थ स्पस्ट करते तथा अंग्रेजो का शांतिपुर्बक कहना न मानने को कहते

6 अप्रैल को बह दांडी पहूंचे और उन्होंने समुद्र का पानी उबालकर नमक बनाना सुरु किया। यह कानून का उल्लंघन था।

यह आंदोलन असहयोग आंदोलन से किस तरह अलग था ? इस बार लोगों ने ब्रिटिशो का असहयोग भी किया साथ ही उन्होने कानून को मानने से भी इनकार करदिया

हजारो लोगो ने नमक कानून तोडा

सरकारी नमक कारखानों के सामने प्रदर्सन किया

पिकेटीग की बिदेसी कपड़ो का बहिस्कार किया

औरते ने भी अपनी भागी दारी दिखाइ

बहुत सारे स्थान पर हिंसक टकराब हुए

सरकार कांग्रेस के नेताओ को गिरफतार करने लगी

April 1930 मे महात्मा गांधी के साथी खान अबदुल गफ्फार खान को गिरफ्तार किया

और एक माह बाद गाँधी जी को गिरफ्तार कर लिया गया

लोगो पर हमले किए गेए ,औरत बच्चो को मारा पीटा गया और 100,000 से यादा लोगो को गिरफ्तार किया गया

गाँधी जी ने एक बार फिर अन्दोलोन बापस ले लिया। और 5 मार्च 1931 को उन्होने इरतिन के साथ समझोते पर दस्तखत कर दिए।

गाँधी -इरतिन समझौते के जरिए गाँधी जी ने लंदन मे होने बाले दुसरे गोलमेज सम्मेलन मे हिस्सा लेने पर सटमति जतायी। इसके बदलेसरकार सभी राजनितिक को रीहा करने के लिए राजी हो गइ।

दिसंबर 1931 में गांधीजी सम्मेलन के लिए लंदन गेए परंतु वार्ता बीच में टूट गेइ और गांधी जी को निराश लौटना पड़ा

लौटने पर गांधी जी ने देखा जवाहरलाल नेहरू और गफ्फार खान दोनों ही जेल में थे और कांग्रेस को गैर कानूनी कर दिया गया, गांधीजी ने दोबारा सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया साल भर तक आंदोलन चला 1934 गति मंद पड़ने लगे। [ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

Part-4

लोगों ने आंदोलन को कैसे लिया

संपन्न किसान

व्यवसायिक फसलों की खेती करने के कारण व्यापार में मंदी और गिरती कीमतो से बहुत परेशान थे।

बे सरकारी लगान चुकाने में असमर्थ थे।

परंतु सरकार ने लगन कम नहीं किया।

इसी कारण से संपूर्ण किसान आंदोलन से सक्रिय थे।

लेकिन जब 1931 मे लगानो के घटे बिना आंदोलन वापस ले लिया गया तो उन्हें बड़ी निराश हुई इसी कारण 1932 में आंदोलन दोबारा शुरू होने पर बहुत ने हिस्सा लेने से इनकार कर दिया।

गुजरात – पटीदार उत्तर प्रदेश – जाट
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गरीब किसान

गरीब किसान लगान मे कमी भी चाहते थे

साथ ही वह यह भी चाहते थे कि जो भाड़ा उन्हें जमीदार को देना पड़ता है उसे भी माफ कर दिया जाए

इसके लिए उन्होंने कोई रेडिकल आंदोलनों में भी हिस्सा लिया जिसका नेतृत्व समाजवादियों को हाथ मे होता था

बड़े किसान और जमीदारों के डर से कांग्रेस “भाड़ा – विरोधी” आंदोलन को प्रायः समर्थन देने में हिचकीजाती थी

इसी कारण गरीब किसान और कांग्रेस के बीच रिश्ते खराब थे[ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

व्यावसायिक वर्ग

उद्योगपति भारतीय अर्थव्यवस्था पर औपनिबेशिक नियंत्रण का विरोध करते थे

बे ऐसी औपनिबेशिक नीतियों का विरोध करते थे जिनके कारण उनकी व्यवसायिक गतिविधियों में रुकावट आती थी

वे विदेशी वस्तुओं के आयात से सुरक्षा चाहते थे

और रुपया – स्टर्लिंग विदेशी विनिमय अनुपात में बदलाव चाहते थे।जिससे आयात में कमी आ जाए

उन्होंने 1920 में भारतीय औद्योगिक एवं व्यवसायिक कांग्रेश ( Indian Industrial and commercial Congress) और 1927 में भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग परिसंघ ( Federation of Indian Chamber of commerce industry fissi) का गठन किया

उन्होंने आंदोलन का आर्थिक सहायता दी और आयातित वस्तुओं को खरीदने या बेचने से मना कर दिया

आंदोलन दोबारा शुरू होने पर इनका उत्साह भी कम हो गया
पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास और जि. डी. बिरला[ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

औद्योगिक श्रमिक

श्रमिक वर्ग ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में नागपुर के अलावा कहीं भी बड़ी संस्था मैं हिस्सा नहीं लिया

जैसे-जैसे उद्योगपति कांग्रेस से नजदीक आ रही थी मजदूर कांग्रेस से छिड़काने लगे थे

फिर भी कुछ मजदूर ने सविनय अवज्ञा आंदोलन मे हिस्सा लिया

उन्होंने विदेशी वस्तुओं को बहिष्कार किया और कुछ गांधीवादी विचारों को कम बेतन ब खराब कार्यस्थितियो के खिलाफ अपनी लड़ाई से जोड़ लिया था

हजारों मजदूरों ने गांधी टोपी पहनकर रैलियो और बहिष्कार अभियानों में हिस्सा लिया

परंतु किसी भी कांग्रेस मजदूरों की मांगो पर सहमति करने पर हिचकीचाती थी क्योंकि कांग्रेस को लगता था कि उद्योगपति आंदोलन से दूर चले जाएंगे[ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

महिलाए

सविनय अवज्ञा आंदोलन में औरतो ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया

गांधी जी के नमक सत्याग्रह के दौरान हजारों औरते उनकी बातें सुनने के लिए घर से बाहर आती थी

उन्होंने जुलूस में हिस्सा लिया, नमक बनाया विदेशी कपड़ों की दुकानों ब शराब कि दुकानों की पिकेटिंग की

बहुत सारी महिलाएं जेल भी गई

गांधी जी के आह्वान के बाद औरतों को राष्ट्र की सेवा करना अपना पवित्रो दायित्व दिखाई देने लगा था [ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

सविनय अवज्ञा की सीमाएं ( धर्म + जाति )

कांग्रेस ने लंबे समय तक दलितो पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि कांग्रेस रूढ़िवादी हिंदू सनातनियों से डरी हुई थी

परंतु महात्मा गांधी ने अछूतों को हरिजन यानी ईश्वर की संतान बताया।और समान अधिकार के लिए सत्याग्रह किया

डॉ अंबेडकर जी ने 1930 में दलितों को दमित वर्ग एसोसिएशन में संगठित किया, और दूसरे गोल सम्मेलन मे दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग की।अंग्रेजों ने उनकी बात मांग ली।

गांधी जी इस पर अनशान पर बैठ गए उनका मानना था कि अलग निर्वाचन क्षेत्रों से एकीकरण की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी

आखिरकार अंबेडकर जी ने गांधी जी की राय मान ली और सितंबर 1932 में ” पूना पैक्ट ” पर हस्ताक्षर कर दिए इससे दलित वर्ग ( अनुसूचित जाति) को प्रांतीय स्व केंद्रीय विधायी परिषदो मे आरक्षित सीटे मिल गई फिर भी, दलित आंदोलन कांग्रेस के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रीय आंदोलन का शंका की दृष्टि से देखते थे

असहयोग खिलाफत आंदोलन के शांत पड़ जाने के बाद मुसलमान के एक बहुत बड़ा तबका कांग्रेश से कटा हुआ महसूस करने लगे। क्योंकि 1920 के दशक के मध्य से कांग्रेस हिंदू महासभा और हिंदू धार्मिक राष्ट्रवादी संगठनों के काफी करीब दिखने लगी थी।

मुस्लिम लीग के नेता मे से एक मोहम्मद अली जिन्ना का कहना था कि अगर मुसलमानो का केंद्रीय और प्रांतीय सरकार में आरक्षित सीट मिल जाए तो बह पृथक निर्वाचन की मांग छोड़ देंगे इस मुद्दे पर बहुत बहस चली परंतु बाद में सारी समानता समाप्त हो गई [ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

Part -5

सामूहिक अपनेपन का भाब

सामूहिक अपनेपन की भावना संयुक्त संघर्ष के पैदा हुई थी

इसके अलावा बहुत सारी संस्कृति प्रक्रियाएं भी थी जिसके जरिए राष्ट्रवाद लोगों की कल्पना और दिलो दिमाग पर छा गया था

इतिहास व साहित्य लोक कथाएं ब गीत, चित्र प्रतीक सभी ने राष्ट्रवाद को साकार करने में अपना योगदान दिया था

(i)-भारत माता की तस्वीर (ii)-लोक कथाओ को पुनर्जीवित करना
(iii)-चिह्न और प्रतीक (iv)-इतिहास की पुनर व्याख्या करना

( i ) भारत माता की तस्वीर

बीसवीं शताब्दी की शुरुआत के साथ भारत की छवि ने भारत माता का रूप ले लिया

यह तस्वीर सबसे पहले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने बनाई थी

1870 मे उन्होंने वंदे मातरम गीत भी लिखा जो उनके उपन्यास ” आनंद मठ ” मे शामिल हुआ

यह गीत बंगाल में स्वदेशी आंदोलन में खूब गया।। बाद में रवींद्रनाथ दैगौर ने भी भारत माता का चित्र बनाया

( ii ) लोक कथाओं को पुनर्जीवित करना

राष्ट्रवाद का विचार लोग कथाओं से मजबूत हुआ इसीलिए राष्ट्रवादीयो ने लोक कथाओं को दर्ज करना शुरू किया अपनी राष्ट्रीय पहचान को ढूंढने और अपने अतीत में गौरव का भाग पैदा करने के लिए लोक परंपरा को बचा कर रखना जरूरी था [ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

नटेसा शास्त्री “द फोकलोर्स आफ सदर्स इंडिया “

( iii ) चिन्ह और प्रतीक

बंगाल में स्वदेशी आंदोलन के दौरान एक तिरंगा झंडा तैयार किया गया ( हरा ‘पीला, लाल )

ब्रिटिश भारत के आठ प्रांतो को 8 कमल के फूल

और हिन्दू ब मुसलमान का प्रतिनिधित्व करना एक अर्धचंद्र दर्शाया गया था

1921 तक गांधी जी ने भी स्वराज का झड़ा तैयार कर लिया था जो सफेद हरा और लाल रंग का था जिसके मध्य मे गाँधी बादी प्रतिक चररते का जगा दी गई थी

( iv )इतिहास की पुनर व्याख्या

अंग्रेज की नजर में भारतीय पिछड़े हुए आदिम लोग थे।

इसके जवाब में भारत के लोगों ने अपनी महान उपलब्धियो की खोज में अतीत की और देखने लगे।

और उन्होंने अपने गौरवमय प्राचीन युग के बारे में लिखना शुरू कर दिया जब कला, वास्तु कला,विज्ञान और गणित, धर्म और संस्कृति आदि फल फूल रहे थे।

इस राष्ट्रवादी इतिहास से पाठकों को अतीत में भारत की महानता ब उपलब्धियां पर गर्व करने और ब्रिटिश से संघर्ष करने में सहायता की।

इस राष्ट्रवादी इतिहास से पाठकों को अतीत में भारत की महानता ब उपलब्धियां पर गर्व करने और ब्रिटिश से संघर्ष करने में सहायता की।[ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]

पूरी विषय याद करने के लिए संक्षिप्त रूप में

1915 गांधीजी भारत आए —>1916, 1917,1918 सत्याग्रह—>1919 रौलट एक्ट सत्याग्रह —>1919 जालियांवाला बाग —> आंदोलन का रुकना —> 1921 असहयोग आंदोलन ( खिलाफत आंदोलन ) —> चौरी चौरा (1922) असहयोग आंदोलन वापस लिया—> 1930 सविनय अवज्ञा आंदोलन— >आंदोलन वापस लिया —> सविनय अवज्ञा आंदोलन दोबारा शुरू किया —> 1934 तक आंदोलन अपनी रफ्तार खो चुका था —> 1942 भारत छोड़ो आंदोलन

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कक्षा 10 इतिहास अध्याय 2 नोट्स pdf

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Full chapter explanation

(1) राष्ट्रवाद का अर्थ

अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना श्रद्धा की भावना तथा सम्मान चेतना राष्ट्रवाद कहलाती है।

यह लोग समान ऐतिहासिक राजनीतिक तथा सांस्कृतिक विरासत साझा करते हैं। कई बार लोग विभिन्न भाषाएं समूह के हो सकते हैं लेकिन राष्ट्र के प्रति प्रेम उन्हें एक सूत्र में बांध रखता है।

(i) प्रथम विश्व युद्ध का भारत पर प्रभाव तथा युद्ध पश्चात परिस्थितियां
  • युद्ध के कारण रक्षा संबंधी खर्चे में बढ़ोतरी हुई थी
  • इसे पूरा करने के लिए कर्जा लिए गए और टैक्स घटाए गए
  • अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए करटम दूसरी ओर इनकम टैक्स को बढ़ाना पड़ा
  • युद्ध के वर्षों में चीजों की कीमत बढ़ गई
  • 1930 से 1918 के बीच दाम दोगुने हो गए
  • दाम बढ़ने से आम आदमी को परेशानी हुई
  • भारत में कोई भागों में उत्पाद खराब होने के कारण भोजन की कमी हो गई
  • फ़्लू की महामारी ने समस्या को और गंभीर कर दिया
  • 1921 की जनगणना के अनुसार अकाल और महामारी के कारण 120  लाख से 130 तक लोग मारे गए
(ii) सत्याग्रह का अर्थ
  • यह सत्य तथा अहिंसा पर आधारित एक नए तरह का जन आंदोलन करने का रास्ता था
(iiii) महात्मा गांधी के सत्याग्रह का अर्थ
  • सत्याग्रह ने सत्य पर बल दिया
  • गांधीजी का मानना था कि यदि कोई  सही मकसद के लिए लड़ रहा तो उसे अपने ऊपर अत्याचार करने वाले से लड़ने के लिए ताकत की जरूरत नहीं होती है | अहिंसा के माध्यम से एक सत्याग्रही लड़ाई जीत सकता है
(iv)महात्मा गांधी द्वारा भारत में किए गए सत्याग्रह के आरंभ
  • महात्मा गांधी 1915 मैं दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे
  • गांधी जी की जन आंदोलन की
  • गांधीजी की जन आंदोलन की उपन्यास पद्धति को सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है
  • भारत में सबसे पहले चंपारण(बिहार )1917 में दमनकारी बागान व्यवस्था के खिलाफ नील की खेती करने वाले किसानों को प्रेरित किया
  • 1917 मैं खेड़ा गुजरात किसानों को कर में छूट दिलवाने के लिए उनके संघर्ष में समर्थन दिया | फसल खराब हो जाने ब प्लेग महामारी के कारण किसान लगाब चुकाने की हालत में नहीं थे
  • अहामदाबाद (गुजरात) 1918 मे कपड़ा कारखाने में काम करने  बाले मौजदूरों के समर्थन में सत्याग्रह आंदोलन किया[ class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi ]
(v)रौलट एक्ट 1919
  • राजनीतिक केंद्रीय को बिना मुकदमा चलाएं 2 साल का जेल में फोन रखने का प्रावधान |( मुख्य प्रावधान )
  • भारत में राजनीतिक गतिविधियों का दमन करने के लिए |( उद्देश्य)
(vi) अन्याय पूर्व
  • भारतीयों की नागरिक आजादी पर प्रहार किया
  • भारतीय सदस्यों की सहमति के दौर पास किया गया
(v)परिणाम
  • 6 अप्रैल को महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक अखिल भारतीय हत्याल का आयोजन
  • विभिन्न शहरों में रैली जुलूस हुए
  • दुकान बंद हो गई
  • स्थानीय नेताओं को हिरासत में ले लिया गया
  • रेलवे वर्कशॉप में कामगारों पर हमला हुई
(vi) रौलट एक्ट 1919 ( बिस्तर में )

इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा 1919 में रौलट एक्ट को पारित किया गया था भारतीय सदस्यों ने उनका समर्थन नहीं किया था लेकिन फिर भी यह पारित हो गया था

class 10 history chapter 2 notes pdf in hindi (FAQ)

राष्ट्रवाद का क्या अर्थ है Class 10?

अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना श्रद्धा की भावना तथा सम्मान चेतना राष्ट्रवाद कहलाती है।

राष्ट्रवाद के 3 प्रकार कौन से हैं?

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, नागरीक राष्ट्रगान और जातिय राष्ट्रवाद यह तीन राष्ट्रवाद का प्रकार है।

राष्ट्रवाद का आविष्कार किसने किया था?

राजा राममोहन राय राष्ट्रवाद का आविष्कार किया था।

राष्ट्रवाद का जन्म कब हुआ?

1789 मे राष्ट्रवाद का जन्म हुआ।

भारत में राष्ट्रवाद की शुरुआत किसने की?

महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भारत में राष्ट्रवाद की शुरुआत किया थ।

फुल चैप्टर एक्सप्लैनेशन आपको नोट्स में मिल जाएगा

Conclusion

तो दोस्तों इस पोस्ट में मे फुल चैप्टर को संक्षिप्त रूप में व्याख्या कीया है। और फुल चैप्टर का हैंडराइटिंग नोट्स पीडीएफ लिंक ऊपर दिया है। आप लोग इस नोट्स को अपने मोबाइल पर फ्री मेंडाउनलोड करके बिना किसी दिक्कत के पढ़ सकते हो।

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